शनिवार, 6 जून 2020

सहारा


मैं  कुछ नहीं हूँ, इशारा  उसी  का है | 
मैं तो बेसहारा हूँ, सहारा उसी का  है | 
कस्ती को हम अपनी भले  ही मान बैठें |  
लेकिन किनारा उसी  का है | 


ज़िन्दगी एक हसीन ख़्वाब है


सौ गुना बढ़ जाती है खूबसूरती,
महज़ मुस्कराने से,
फिर भी बाज नही आते लोग,
मुँह फुलाने से ।
ज़िन्दगी एक हसीन ख़्वाब है ,
जिसमें जीने की चाहत होनी चाहिये।
ग़म खुद ही ख़ुशी में बदल जायेंगे,
सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनी चाहिये।

सौग़ात

बैठे बिठाए जान गए,  औकात अपनी आज हम।

दिल में समेटे ले चले, सौगात अपनी आज हम। 

      उम्मीद के दरिया में ढूढी, दो बूँद पानी की यहाँ।

      सारी कहानी  लिख  गई, मेरी जवानी की यहाँ।

सूखे हलक में खोजते, बिसात अपनी आज हम।

दिल में समेटे ले चले, सौगात अपनी आज हम।

       गुम सुम  अँधेरा दीखता, वीरान  रेगिस्तान में।

       टिम टिमादे दीप कोई, लोरी  सुनादे कान में।

किससे कहें, कैसे करें, हिमात अपनी आज हम।

दिल में समेटे ले चले, सौगात अपनी आज हम।

         दुलारती थीं माँ तरह, सहारतीं सखा तरह।

         दाहिना सा हाथ बन, बन राह मेरी तरह तरह।

द्रवित मन से कह रहे प्रभु,  बात अपनी आज हम।

दिल में समेटे ले चले, सौगात अपनी आज हम।