बैठे बिठाए जान गए, औकात अपनी आज हम।
दिल में समेटे ले चले, सौगात अपनी आज हम।
उम्मीद के दरिया में ढूढी, दो बूँद पानी की यहाँ।
सारी कहानी लिख गई, मेरी जवानी की यहाँ।
सूखे हलक में खोजते, बिसात अपनी आज हम।
दिल में समेटे ले चले, सौगात अपनी आज हम।
गुम सुम अँधेरा दीखता, वीरान रेगिस्तान में।
टिम टिमादे दीप कोई, लोरी सुनादे कान में।
किससे कहें, कैसे करें, हिमात अपनी आज हम।
दिल में समेटे ले चले, सौगात अपनी आज हम।
दुलारती थीं माँ तरह, सहारतीं सखा तरह।
दाहिना सा हाथ बन, बन राह मेरी तरह तरह।
द्रवित मन से कह रहे प्रभु, बात अपनी आज हम।
दिल में समेटे ले चले, सौगात अपनी आज हम।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें